Thursday, 24 September 2015

तेजी से हो रहा है RSS का प्रसार, 61 फीसदी बढ़ीं शाखाएं


डॉ. अरूण जैन
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ देश के तमाम हिस्सों में तेजी से अपनी पैठ बढ़ा रहा है। पिछले पांच साल के दौरान इसकी सबसे छोटी इकाई यानी शाखाओं में 61 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।  एक आंकड़े के मुताबिक, 2015 में देशभर में हर दिन नियमित रूप से 51,335 शाखाएं लग रही हैं। आलोचकों की निगाह में संघ भले ही अतिवादी संगठन है, लेकिन वे यह भी मानते हैं कि जमीनी स्तर पर इसके संगठन का कोई तोड़ नहीं। हालांकि, शाखा से जुडऩे वाले स्वयंसेवकों की कोई आधिकारिक सदस्यता नहीं होती, लेकिन हर साल शाखाओं की संख्या के अध्ययन के आधार पर पाया गया है कि 2010-2011 से 2014-2015 के दौरान दैनिक शाखाओं में 29 फीसदी, साप्ताहिक शाखाओं में 61 फीसदी और मासिक शाखाओं में 40 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।कुछ ऐसा ही रुझान मुंबई और ऐसे ही अन्य शहरों में भी देखने को मिला है। मुंबई में दैनिक शाखाओं में 34 फीसदी की वृद्धि हुई है तो साप्ताहिक शाखाओं की तादाद 70 फीसदी तक बढ़ गई है। नवी मुंबई में भी शाखाओं की संख्या पिछले पांच साल में दोगुनी हो गई है। देशभर में सबसे तेजी से शाखाओं की संख्या में बढ़ोतरी 2013-14 और 2014-15 के दौरान हुई है। कुछ जानाकारों का यह भी मानना है कि इसके पीछे लोकसभा चुनाव के पहले बने बीजेपी समर्थक माहौल और उसके बाद बीजेपी सरकार का सत्ता पर काबिज होना है। गौरतलब है कि बीजेपी संघ के 38 आनुसांगिक संगठनों में से ही एक है। हालांकि, कोंकण क्षेत्र में संघ के प्रवक्ता प्रमोद बापत की मानें तो संघ की शाखाओं में हुई बेतहाशा वृद्धि का केंद्र में बीजेपी की सरकार से कोई लेना-देना नहीं है। बापत के मुताबिक, संगठन दशकों तक कांग्रेस के राज में भी फलता-फूलता रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि केरल में कभी बीजेपी सरकार नहीं रही है, लेकिन देश में सबसे ज्यादा करीब 4500 शाखाएं वहीं हैं। इसके अलावा, संघ की पकड़ पश्चिम बंगाल में भी काफी मजबूत है, जबकि यहां भी बीजेपी लंबे समय से हाशिये पर रही है। संघ की जमीनी पकड़ मजबूत है, तो सोशल मीडिया पर भी इस संगठन की विचारधारा के समर्थकों की कमी नहीं है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के फेसबुक पेज को करीब 15 लाख लोगों ने लाइक किया है वहीं ट्विटर पर भी संगठन के 1.5 लाख फॉलोअर्स हैं। बापत बताते हैं कि शाखा सिर्फ शहरों में ही सक्रिय रूप में नहीं है, देश की हर तहसील और करीब 55 हजार गावों में नियमित रूप से शाखा लगाई जा रही है। संगठन से जुड़े कुछ लोगों का मानना है कि आरएसएस ने वक्त के साथ खुद को हमेशा बदला है। अब शाखाएं बच्चों, युवाओं और प्रफेशनल्स की सुविधा के हिसाब से भी लगाई जा रही हैं ताकि किसी की पढ़ाई या नौकरी को प्रभावित किए बगैर उन्हें संघ से जोड़ा रखा जा सके।

No comments:

Post a comment