Monday, 10 October 2016

अमेरिका-भारत सम्बंध व्यक्तिगत सम्बंध महत्वपूर्ण या देश सुधार...?



सांता कलारा (केलीफोर्निया)। भारतीय पत्रकार अरूण जैन के साथ सांता कलारा शहर का भ्रमण किया, इस दौरान हम लोगों ने यह महसूस किया कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र भाई मोदी ने अपनी विगत यात्रा अमेरिका यात्राओं के दौरान यहॉं के राष्ट्रपति के साथ व्यक्तिगत सम्बंधों की अभिवृद्धि के अलावा यदि यहां के प्रशासनिक सुधारो पर चिंतन-मनन कर उन्हे भारत में लागू करने पर बल दिया होता, तो उससे न सिर्फ प्रधानमंत्री को विदेशों के साथ भारत में भी लोकप्रियता में और वृद्धि होती, बल्कि देश आज कई दृष्टि से अनुशासित और कर्तव्यनिष्ठ हो गया होता।
    आज इस शहर की यात्रा के दौरान हमने जहां शनीवेल हिन्दू मंदिर में हिन्दूओं के सभी देवी-देवताओं को अर्चना के साथ गणेशोत्सव के दर्शन किए, वहीं पर्यूषण पर्व के दौरान जैन समाज का अपने आराध्य के प्रति निष्ठा और सेवा भाव के भी दर्शन किए। करीब पचास कि.मी. की इस कार यात्रा के दौरान लोग सबसे अधिक यहां के यातायात नियंत्रण और यातायात नियमों के प्रति यहां के आम आदमी के समर्पण भाव से प्रभावित हुए। इस यात्रा के दौरान हमें राष्ट्रीय व राजकीय मार्ग और गली-कूंचो में न तो पुलिस कर्मी नजर आया नजर आया और न ही कोई नियंत्रक, सब कुछ अनुशासन बद्ध टेªफिक जारी था।
    उसके बाद जब हमारी नजर यहॉं के मकानों, उनके द्वारा घेरी गई भूमि पर पड़ी तो देखा कि यहां न तो किसी ने अतिक्रमण किया है और न मकान के आसपास भारत जैसी कोई सुरक्षा दीवार या द्वार ही बनाया है, कहने का मतलब यह कि सब कुछ नियमों के दायरे में।
    अमेरिका प्रवास के दूसरे दिन तक हमें न तो एक भी झुग्गी-झोपडी नजर आई और न घरों में काम करने वाली बाई। ऐसा कतई नहीं है कि यहां बेरोजगारी या गरीबी नहीं है, वह तो ईश्वर की तरह ही हर कहीं व्याप्त है, किन्तु यहां गरीबी के साथ लाचारी कतई नहीं है।
    अपनी अभी तक की दो दिनी यात्रा में हमनें अवश्य महसूस किया कि यहां मोटर साईकिल या बाईक बहुत ही कम है, यहां बाईक को विलासिता की वस्तु माना जाता है और कार को आवश्यक आमजीवन यापन की वस्तु। इसीलिए यहां के सम्पन्न या करोड़पति-अरबपति मंहगी मोटर साईकलें चलाते है और सामान्य वर्ग कार चलाता है।
    इसके अतिरिक्त यहां शिक्षा के क्षेत्र में आई क्रांमि के भी दर्शन हुए, यहां सरकारी स्कूलों में सम्पन्न वर्ग के बच्चे पढ़ते है और निजी स्कूल गरीब बच्चों से भरे रहते है, यहां सरकारी स्कूलों में निःशुल्क शिक्षा है, जब कि निजी स्कूलों पर सरकार का सख्त नियंत्रण है।
    आम आदमी से जुड़ी कुछ ये अच्छाईयां हमें हमारी प्रारंभिक यात्रा के दौरान नजर आई, यदि मोदी जी व्यक्तिगत सम्बंधों की अपेक्षा इन पर ध्यान देकर भारत में ऐसी व्यवस्था लागू करते तो वह न सिर्फ मोदीजी की ‘कुर्सी’ को दीर्घजीवी भी बनाती बल्कि देश के हित में भी होती।

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