Wednesday, 14 October 2015

शिप्रा नदी के पानी में तो नही नहलाएंगे, यह पक्का है ?


अरूण जैन
सभी जानते हैं, मानते हैं कि सिंहस्थ महापर्व हो अथवा वर्ष में आने वाले अन्य पर्व-महोत्सव, स्नान का पुण्य केवल शिप्रा नदी स्नान का है । पर त्रासदी यह है कि शिप्रा नदी का मूल स्त्रोत तो लगभग विलुप्त हो गया है। अब तो शिप्रा नदी क्षेत्र में कभी गंभीर नदी, कभी चंबल नदी, कभी साहिबखेडी़-उंडासा और कभी नर्मदा नदी के पानी से धर्मालुओं को स्नान करवा दिया जाता है । इस बार सिंहस्थ में भी नर्मदा, चंबल, गंभीर के मिले-जुले पानी से ही श्रद्धालुओं को पुण्य स्नान करवाया जाएगा । साथ ही 11 से 17 नालों का पानी भी नहाने को मिलेगा !
सिंहस्थ का दूसरा और बड़ा मुख्य मुदद्ा धर्मालुओं को शिप्रा नदी के शुद्ध जल से स्नान करवाने का है, जो लगभग खतम इसलिए हो गया है क्योंकि शिप्रा नदी की अपनी स्वयं की आवक और स्त्रोत, दोनो समाप्त प्रायः है । जिन्होने पिछला सिंहस्थ देखा है उन्हें अच्छी तरह याद होगा कि धर्मालु और शहरवासी गंभीर नदी के पानी में नहाए थे। 2004 से 2016 के मध्य इतना विकास और हो गया है कि शिप्रा नदी में मिलने के लिए चंबल और नर्मदा के स्त्रोत भी जोड़े जा चुके हैं । यह लाभ तो है ही कि नदी क्षेत्र में पानी की कमी नही आएगी। क्योंकि हर शाही स्नान से पहले और बाद में नदी का पानी बदलना पड़ता है । 
गंभीर त्रासदी है कि शिप्रा शुद्धिकरण के नाम पर पिछले लगभग 48 वर्षों में (जहां तक मेरी याददाश्त है) करोड़ों नहीं, अरबों रूपए खर्च किए जा चुके हैं । इसके बावजूद शहर के गंदे नाले, ओद्योगिक प्रदूषण आज तक शिप्रा नदी में जस के तस मिल रहे हैं। फिर यह अरबों रूपया कहां गया, यह पृथक जांच और बहस का विषय है।
आज भी आप नदी पर जाकर देखें तो शिप्रा नदी का पानी ठहरा हुवा है। उसमें बहाव नाम को भी नहीं है। हाल के कुछ वर्षों में नर्मदा नदी से इसे मिलाने के नाम पर करोड़ो रूपए खर्च कर दिये गए। पर नर्मदा का जल लाने पर अभी भी दो-तीन दिन की ‘मीडिया कमेन्ट्री’ चलती है तब कुछ पानी आ पाता है। गरजे यह एकदम पक्की बात है कि सिंहस्थ में शिप्रा नदी क्षेत्र में नर्मदा, गंभीर अथवा चंबल का पानी ही नहाने को मिल सकेगा। वैसे माननीय मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान तो नर्मदा का पानी सिंहस्थ के दौरान लगातार शिप्रा में बनाए रखने के निर्देश अधिकारियों को दे चुके हैं । अब यह धर्मालुओं का भाग्य कि उन्हें किस नदी का जल शिप्रा नदी में नहाने के लिए उपलब्ध होगा। और साहब! इससे अधिकारियों को क्या फर्क पड़ता है, मतलब तो नहलाने से है, सो नहला देंगे। हां, आचमन करना, न करना आपकी श्रद्धा है !

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