Tuesday, 27 October 2015

RSS की पहली शाखा में सिर्फ 5 लोग हुए थे शामिल, आज यह बन गया दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन

डाॅ. अरूण जैन
       देश में हिंदू राष्ट्रवाद की पताका फहरा रहे राष्ट्रीय स्वयं सेवक की स्थापना के 90 साल पूरे हो रहे हैं. देश में कई मुद्दों पर अपनी राय बेबाकी से रखने वाले इस संगठन के नेताओं का नाता हमेशा से विवादों से जुड़ा रहा है. इस संगठन पर महात्मा गांधी की हत्या की साजिश रचने का भी आरोप लगा था. वहीं भारत-चीन युद्ध में सैनिकों की मदद करने पर देश के पहले प्रधानमंत्री ने गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल होने का भी न्यौता दिया था. लेकिन आरएसएस से जुड़ी कुछ और बातें हैं जिनको कई नहीं जानता है - 1- डॉक्टर केशवराव बलिराम हेडगेवार ने 27 सितंबर 1925 को संघ की स्थापना की थी. उस दिन विजयादशमी का त्योहार था. तिथि के हिसाब से इस संगठन की स्थापना के 90 साल पूरे हो जाएंगे. इसका मुख्यालय नागपुर में है. 2- संघ की पहली शाखा में सिर्फ 5 लोग शामिल हुए थे. जिसमें सभी बच्चे थे. उस समय में लोगों ने हेडगेवार का मजाक उड़ाया था कि बच्चों को लेकर क्रांति करने आए हैं. लेकिन अब संघ विश्व का सबसे बड़ा स्वयंसेवी और हिंदू संगठन है. 3- संघ की ओर से देश की लगभग हर गली-मुहल्ले में शाखाएं लगाई जाती हैं. जिसमें एक मुख्यशिक्षक होता है. शाखा में व्यायाम,खेलकूद के साथ बौद्धिक कार्यक्रम होता है. संघ के स्वयंसेवकों के लिए देश सेवा के लिए प्रेरित किया जाता है. 4- शाखा में भगवा रंग का झंडा फहराया जाता है. जो हिंदू धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा है. संघ का उद्धेश्य देश को हिंदू राष्ट्र बनाना है. इस विचारधारा को लेकर ही संघ पर सांप्रदायिकता का आरोप लगता है. 5- संघ की प्रार्थना नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे...शाखा और हर बड़े कार्यक्रम में गायी जाती है. स्वयंसेवकों की ड्रेस सफेद शर्ट, काली टोपी और लाठी है. 6- संघ में प्रचारक होता है जो देश और संगठन की सेवा करता है. उसकी सेवाओं और अनुभव के हिसाब से उसे प्रमोशन भी मिलता रहा है. इनका काम संघ का विस्तार करना भी होता है. संघ का प्रचारक बनने के लिए ओटीसी यानी एक खास तरह की ट्रेनिंग करनी होती है. 7- संघ का सबसे बड़ा अधिकारी सरसंघचालक होता है जिस पद पर अभी मोहन भागवत हैं. इसके अलावा सरकार्यवाह यानी जनरल सेक्रेटी होते हैं. सर कार्यवाह की मदद के लिए सह सरकार्यवाह होते हैं. 8- संघ के कई अनुषांगिक संगठन जैसे सेवा भारती, एबीवीपी, मजदूर संघ, वीएचपी देश में सक्रिय हैं. इसके अलावा कई एनजीओ भी हैं जो वनवासी क्षेत्रों में काम कर रहे हैं. 9- संघ के दूसरे सरसंघचालक सदाशिवराव गोलवलकर की किताब बंच ऑफ थॉट विवादों में रही है. लेकिन इसको मानने वाले भी देश में करोड़ो की संख्या में है. 10- बीजेपी के सभी बड़े नेता जैसे अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, नरेंद्र मोदी संघ में प्रचारक रह चुके हैं. कहा जाता है कि बीजेपी की असली ऊर्जा संघ के स्वयंसेवक ही हैं. 11- आपातकाल में जयप्रकाश नारायण ने भी संघ की ताकत को समझा था और इसे अपने आंदोलन के साथ जोड़ लिया था. 12 संघ का दावा है कि आजादी के पहले उसके एक शिविर में महात्मा गांधी भी पहुंचे थे जो दलितों और उंची जाति के लोगों को एक साथ भोजन करता देख दंग रह गए थे. 13- हालांकि संघ की स्थापना से लेकर अब तक इस सगंठन का नाम विवादों से भी जुड़ा रहा है. हाल ही में दादरी कांड पर संगठन के मुखपत्र ऑर्गेनाइजर में इस घटना को सही बताया गया था. हालांकि बाद में संघ की ओर इस पर सफाई भी दी गई थी. 14- 1990-92 में अयोध्या मे गिराई गई बाबरी मस्जिद मामले में संघ पर ही आरोप लगा था. हालांकि संघ इस आरोप को सिरे से खारिज करता रहा है. 15- आरएसएस के चौथे प्रचारक राजेंद्र सिंह उर्फ रज्जू भैया की आत्मकथा में दावा किया गया है कि उत्तरप्रदेश में गौहत्या पर प्रतिबंध 1955 में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तत्कालीन सीएम गोविंद वल्लभ पंत ने रज्जू भैया के कहने पर ही लगाया गया था.

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