Monday, 3 August 2015

आखिर क्या है उज्जैन प्रशासन की मजबूरी ?



डाॅ. अरूण जैन
उज्जैन में सिंहस्थ को लेकर काफी कुछ काम हो रहे हैं । पर तीन बत्ती चैराहे को पूर्ण रूप से विकसित करने का कार्य जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन ने अब तक हाथ में नही लिया है। चैराहे के कोने पर चल रहा पेट्रोल पम्प सड़क सुरक्षा समिति और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कंपनी की स्वीकृति और सहमति के बाद भी अब तक नही हटाया गया है। फलस्वरूप बैरवा समाज के प्रमुख संत बालीनाथजी की प्रतिमा उपेक्षित है और बाधापूर्ण स्थल पर स्थापित करने से प्रशासन का मुंह चिढ़ा रही है ।
तीन बत्ती चैराहे का यह पेट्रोल पम्प चैराहा विकास की योजना के तहत हटाए जाने का निर्णय करीब दो दशक पूर्व ही यातायात समिति में हो गया था, जब शहर में ट्रेफिक वार्डन भी हुवा करते थे। समिति के निर्णय पर पेट्रोलियम कंपनी हिन्दुस्तान पेट्रोलियम ने भी स्वीकृति दे दी थी और इसके एवज में संचालक रमेशचन्द्र जैन को गैस एजेन्सी भी आवण्टित कर दी, जो समीप ही कमला नेहरू मार्ग पर कार्य कर रही है। प्रशासन की सुस्ती का फायदा संचालक उठा रहा है। वह पेट्रोल पम्प पर पेट्रोल भी बेच रहा है और गैस एजेन्सी भी चला रहा है अर्थात दोनों हाथ में लड्डू लेकर खा रहा है ।
जिला-पुलिस प्रशासन की उदासीनता कहिए या अनदेखी कि वह अपने पूर्व निर्णयों का न तो रिकार्ड संभाल कर रख पाता है और न ही उनका ईमानदारी से क्रियान्वयन कर पाता है। इसके अभाव में संत बालीनाथ की महत्वपूर्ण प्रतिमा जो सही स्थान पर लगना थी वह सड़क के ऐसे स्थान पर लगा दी गई है, जहां से देवास रोड की ओर से इन्दौर रोड पर मुड़ने वाले वाहनों को प्रर्याप्त स्थान ही नहीं मिल रहा है। फलस्वरूप यह महत्वपूर्ण प्रतिमा कभी भी क्षतिग्रस्त हो सकती है ।

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