Tuesday, 1 December 2015

सिंहस्थ महापर्व अस्त-व्यस्त भौगोलिक स्थिति में ही होगा ।


डॉ. अरूण जैन
सिंहस्थ मेला क्षेत्र ‘‘उखाड़-पछाड़ की स्थिति में अब तक बेहद अस्तव्यस्त है और लगता नही कि मेला प्रारंभ होने तक समेटा-समेटी हो पाएगी । मेला इसी अस्त-व्यस्त भूमि पर अव्यस्थाओं के बीच ही होगा। अधिकारी भी लगता है बेशर्म हो गए है। इधर संतो की अग्रिम टुकडियों का आगमन और उनकी गतिविधिया अभी से शुरू हो गई हैं।
उच्च प्रशासनिक अधिकारी, मंत्री चाहे जितने पापड़ बेल लें, पर निर्माण कार्यों से जुड़े अधिकारियों ने शर्म तो ताक पर रख दी है। निश्चित ही ठेकेदार को तो शह मिल रही है। वरना प्रदेश का मुखिया बार-बार दिसम्बर तक काम पूरा करने के निर्देश दे जाएं, संभागायुक्त और अन्य उच्चाधिकारी आए दिन मैदानी बैठक में सटकाएं, उसके बाद भी ढाक के तीन पान का क्या अर्थ लगाया जाए? शायद यही कारण है कि एक निर्माण अधिकारी ने उच्च अधिकारी को मुंह पर कह दिया कि सर यह रोटी नही है कि बनाई और खा ली। काम तो अपने समय से होगा।
निर्माण कार्यों की गंभीरता का अंदाजा कुछ बातों से लगा सकते हैं। हरिफाटक ओवरब्रिज का इन्दौर गेट वाला सिरा देखिए, इसकी चौड़ीकरण की डिजाइन ही अभी तक भोपाल सें स्वीकृत नहीं हुई है। इधर ठेकेदार ने पिछले आठ महीने से उस हिस्से को बंद कर तोड़ा-ताड़ी कर रखी है । पूरा शहर परेशान है, पर किसे परवाह है। जीरो पाइंट ओवरब्रिज डिजाइन के पचड़ों में पड़कर देरी से शुरू हुवा, सो पूरा होने के आसार नहीं दिखते। चिंतामन ओवरब्रिज के दोनों सिरे अभी तक पूरे नहीं हुए हैं। चिंतामन, हासामपुरा, बड़नगर की ओर जाने वाले वाहन अभी भी रेलवे क्रॉसिंग पर कतार लगाकर खड़े रहते हैं । ओवरब्रिज के चक्कर में नीचे की सड़क बदहाल और निहायत टूटी-फूटी अवस्था में है, सो वहां से गुजरने वाले भारी वाहन परेशानी में है ही। मंगलनाथ क्षेत्र में भी सड़कों के हाल अच्छे नही हैं। साधु-संत भी अपनी नाराजी लगातार जाहिर कर रहे हैं। अब देखिए मेला तो तय तिथियों पर होगा ही, चाहे काम पूरे हों या नही। अब यह बात जुदा है कि आने-वाले धर्मालुजन कैसे मेला क्षेत्र में घूमेंगे। इसकी परवाह शायद प्रशासन को भी नहीं है।

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