Wednesday, 13 April 2016

आनन्दी बेन के बहाने मोदी का कईयों पर निशाना


डाॅ. अरूण जैन
पिछले दिनों गुजरात की मुख्यमंत्री आनन्दी बेन पटेल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिलीं, इसी दौरान नरेन्द्र मोदी ने अनन्दी बेन से भेंट के दौरान कहा कि शिकायतें मिली हैं कि सरकार के कामकाज में आपके दोनों भाई-बहन जबरदस्ती  दखल करते हैं और खूब पैसा बना रहे हैं, मोदी के द्वारा अनन्दी बेन से की गई इस तरह की चर्चा के बाद राजनीतिक क्षेत्र में कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं इस संबंध में राजनीतिक पण्डितों का मानना है कि कहीं मोदी ने अपने प्रदेश गुजरात की मुख्यमंत्री अनन्दी बेन के बहाने पार्टी के अन्य मुख्यमंत्री और मंत्रियों पर तो निशाना नहीं साधा है? यह उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश के संगठन के मुखिया नन्दकुमार सिंह चौहान के द्वारा मोदी की प्रदेश में आने की तैयारी के दौरान यह कहना कि हमारे कामकाज का आंकलन दिल्ली भी करती है, श्री चौहान के इस तरह के संकेत से यह झलकता है कि कहीं मोदी ने अनन्दी बेन के बहाने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री  और मंत्रियों को तो चेतावनी देने का काम तो नहीं किया है, यह सर्वविदित है कि जिस तरह की शिकायतें अनन्दी बेन के मामले में उनके परिजनों का राजनीति में दखलंदाजी करने और पैसा कमाने जैसी बात नरेन्द्र मोदी द्वारा की गई। ठीक उसी तरह का माहौल मध्यप्रदेश में वर्षों से स्थित है और प्रदेश की प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस के नेताओं द्वारा सदन से लेकर सड़कों तक मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के परिजनों से लेकर उनके मंत्रीमण्डल के सदस्यों पर कई गंभीर आरोप लगाए हालांकि यह आरोप सत्ता बल के दम पर दबा दिए गए तो वहीं कई मामलों को लेकर न्यायालय तक विपक्षी दलों के नेताओं को घसीटा गया। शायद इसी वजह से वह दबते रहे मगर भाजपा के संगठन के मुखिया नन्दकुमार सिंह चौहान के हाल ही में इस तरह के दिये गये बयान से अब यह स्पष्ट हो गया है कि प्रदेश के सत्ताधीशों के परिजनों द्वारा राज्य में चल रही चर्चाओं के अनुसार प्रदेश में भी सत्ता पर काबिज सत्ताधारियों के परिजनों के द्वारा ठीक गुजरात की मुख्यमंत्री अनंदी बेन के परिजनों की तरह लगातार गतिविधियां चल रही हैं, शायद इसका भान प्रधानमंत्री को है, हालांकि लोगों का यह भी मानना है कि प्रधानमंत्री के राज्य के सत्ता से जुड़े हर व्यक्ति की पल-पल की खबरें ले रहे हैं, इसके पीछे प्रधानमंत्री की क्या मंशा है, यह तो वही जाने लेकिन उनका यह नारा कि ना खायेंगे और ना खाने देंगे के विपरीत इस प्रदेश में खाओ और खाने दो की नीति का अनुसरण किया जा रहा है और इसी के चलते राज्य में मंत्रियों अधिकारियों, सत्ता के दलालों और ठेकेदारों का एक रैकेट सक्रिय है जो तमाम सरकारी योजनाओं में हेराफेरी करके जहां सरकारी खजाने को चूना लगाने का काम कर रहा है इसके प्रमाण पिछले दिनों मुख्यमंत्री द्वारा अपने अधिकारियों के  सूखा पर्यटन के अंतर्गत राज्यभर में भेजने और जमीनी हकीकत का पता लगाने के बाद जो रिपोर्ट इस सूखा पर्यटन के बाद अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को सौंपी है उसमें इस बात का उल्लेख है कि राज्य में सरकारी योजनाओं में भयंकर धांधली चल रही है और बिना पैसे लिये लोगों का कोई काम नहीं हो रहा है तो वहीं सरकारी योजनाओं की जानकारी आमजन तक नहीं है, इससे यह साफ जाहिर हो जाता है कि सरकारी योजनाओं की जानकारी देने काम जहां सरकारी अधिकारियों का है तो वहीं संगठन से जुड़े लोगों का भी यह दायित्व बनता है कि वह लोगों की समस्याओं से रूबरू हों और उनकी पार्टी की सरकार द्वारा चलाई जा रही लोककल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्रदेश के जन-जन तक पहुंचायें लेकिन ऐसा कुछ नजर नहीं आ रहा है कि पार्टी से संगठन से जुड़े लोगों की रुचि इस ओर हो, ऐसे कई अवसर भी आए जब प्रदेश के सत्ता और संगठन से जुड़े मुखियाओं द्वारा अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं से यह कहा गया कि वह राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही जनहितैषी योजनाओं की जानकारी जन-जन तक पहुंचाएं लेकिन आज तक ऐसा कहीं नजर नहीं आया कि संगठन से जुड़े लोगों द्वारा इस तरह का कोई कदम उठाया हो, हाँ यह जरूर देखा गया कि जो सरकार द्वारा जनकल्याणकारी येाजनायें आम जनता के लिये चलाई जा रही हैं उन योजनाओं का लाभ उठाने में संगठन के लोग सक्रिय दिखाई देते हैं, शायद यही वजह है कि प्रदेश भर में संगठन से जुड़े अधिकांश लोगों का जीवन स्तर इस सरकार के चलते ही सुधरा है यह उनके आसपास के रहनेवाले लोग भी जान रहे हैं तो वहीं शिवराज सिंह चौहान ने शायद यही वजह है कि नरेन्द्र मोदी के मध्यप्रदेश प्रवास के दौरान सीहोर जिले के शेरपुरा में आने का जब न्यौता पूरे प्रदेश के किसानों को किसान कुंभ के लिये देते वक्त यह भी कहा कि कार्यकर्ता अपने वाहनों से आयें मुख्यमंत्री के इस संदेश से यह साफ जाहिर होता है कि प्रदेश में उनके कार्याकाल के दौरान उन भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं की स्थिति में सुधार हुआ है जिनके पास कल तक टूटी साइकिल खरीदने तक के पैसे नहीं रहते थे आज वह आलीशान भवनों और लग्जरी वाहनों में फर्राटे लेते नजर आ रहे हैं। इस सब स्थिति को देखते हुए राष्ट्रीय जनशक्ति पार्टी की तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष सुश्री उमा भारती के 2009 तक लगाए गए इस तरह के आरोपों की याद आ जाती है और यह साफ हो जाता है कि उन्होंने उस समय जो कहा वह अब हकीकत प्रदेश में भाजपाई कार्यकर्ताओं और नेताओं के विकास को देखकर नजर आने लगा है, मामला जो भी हो लेकिन हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा उनके गृह जिले गुजरात की मुख्यमंत्री अनन्दी बेन के परिजनों के सरकारी कामकाज में दखलंदाजी और पैसा कमाने की जो बात कही है, देखना अब यह है कि मध्यप्रदेश में चल रहे इस तरह के वातावरण को लेकर प्रधानमंत्री इस प्रदेश पर कब निगाहे करम करेंगे जब ऐसा होगा तो उनका यह नारा न खाएंगे न खाने देंगे के प्रति प्रदेश के साढ़े सात करोड़ नागरिकों में भी यह विश्वास जागृत होगा कि वह जो कहते हैं वह करते हैं, देखना अब यह है कि वह क्षण कब आएगा जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस तरह का संदेश प्रदेश के अपने नेताओं को देंगे। 

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