Wednesday, 16 August 2017

तनाव की सीमा

डॉ. अरूण जैन
भारत और चीन के बीच सीमा पर पिछले करीब डेढ़ महीने से कायम विवाद अब गंभीर शक्ल लेने लगा है। हाल के दिनों में चीन ने भारत के कई कदमों पर जिस तरह आक्रामक बयानबाजी की है, उससे यही लगता है कि उसकी दिलचस्पी तनाव को कम करने के बजाय उसे हवा देने में है। भारत और चीन के बीच सीमा पर पिछले करीब डेढ़ महीने से कायम विवाद अब गंभीर शक्ल लेने लगा है। हाल के दिनों में चीन ने भारत के कई कदमों पर जिस तरह आक्रामक बयानबाजी की है, उससे यही लगता है कि उसकी दिलचस्पी तनाव को कम करने के बजाय उसे हवा देने में है। यह अपने आप में एक विचित्र आरोप है कि भारत चीन की सीमा पर सैनिक भेज कर राजनीतिक उद्देश्य पूरा करना चाहता है। अगर सुरक्षा संबंधी जरूरतों के मद्देनजर भारत की सेना कोई गतिविधि करती है तो उस पर चीन को आखिर भारत को ऐसा नहीं करने की सलाह देने की जरूरत क्यों लगती है? भूटान से लगती सीमा पर तनाव जरूर है, लेकिन चीन के इस आरोप का क्या आधार है कि भारतीय सैनिकों ने दोनों देशों के बीच निर्धारित सीमा को अवैध तरीके से पार किया है? जबकि भारत का यह कहना है कि डोकलाम क्षेत्र में सड़क का निर्माण भारत की सामरिक सुरक्षा के लिहाज से एक संवेदनशील मसला है, इसलिए उसने पिछले महीने इस क्षेत्र में अपने सैनिक भेजे थे। मकसद बस इतना था कि इसे रोका जा सके। दरअसल, भारत को यह स्वाभाविक चिंता है कि इस क्षेत्र में अगर सड़क तैयार हो गई तो पूर्वोत्तर के राज्यों को देश से जोडऩे वाले बीस किलोमीटर के दायरे में चीन का दखल बढ़ जाएगा। इस इलाके को 'सेवन सिस्टर्सÓ के नाम से जाना जाता है और यह सामरिक रूप से बेहद अहम है। दूसरी ओर, चीन के सरकारी मीडिया ने साफ तौर पर कहा कि वह भारत से निपटने के लिए तैयार है। इस तरह के उकसावे वाले बयानों का क्या आशय निकाला जाए! गौरतलब है कि सिक्किम के डोकलाम को लेकर चीन और भूटान के बीच विवाद होता रहता है और इधर इसी मसले पर भारत और चीन के बीच भी सीमा विवाद तीखा हुआ है। बीते कुछ समय से लगातार इस क्षेत्र में भारत और चीन ने सीमा पर अपनी फौज की तादाद बढ़ा दी है। स्वाभाविक ही यह एक संवेदनशील स्थिति है, जिसे अगर वक्त रहते नहीं संभाला गया तो यह एक बड़े नुकसान की वजह बन सकती है। यही कारण है कि यह मामला भारत के लिए चिंता का सबब है।  को संसद में पूर्व रक्षा मंत्री मुलायम सिंह यादव ने कहा भी कि आज भारत की सबसे बड़ी चिंता पाकिस्तान नहीं, चीन है क्योंकि वह हमले की तैयारी कर चुका है। अगर उनकी आशंका का आधार मजबूत है तो निश्चित रूप से यह स्थिति भारत के लिए सजग रहने की है। दोनों देशों के बीच करीब साढ़े तीन हजार किलोमीटर लंबी सीमा है। सीमा विवाद की वजह से ही 1962 का युद्ध हुआ था, लेकिन अब भी कुछ इलाकों को लेकर विवाद कायम है, जिसकी वजह से भारत और चीन के बीच तनाव पैदा हो जाता है। यह किसी से छिपा नहीं है कि विस्तार के कई मोर्चों पर चीन एक साथ काम कर रहा है, जिसमें सड़क, रेल, आर्थिक शक्ति और तकनीकी विकास प्रमुख है। खासतौर पर भारत की सीमा से सटे क्षेत्रों में वह जिस तरह सैन्य गतिविधियां चला रहा है, वह भारत की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है। चीन के रवैये का अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि उसने सिक्किम के नाथुला दर्रे से होकर जाने वाले सत्तावन भारतीय तीर्थयात्रियों को कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए रास्ता देने से भी इनकार कर दिया। क्या इससे यह जाहिर नहीं होता कि वहां अवैध गतिविधियों का आरोप लगा कर चीन अपने ऊपर लगने वाले आरोपों से पल्ला झाडऩा चाहता है?

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