Thursday, 14 April 2016

पंच केदार: धार्मिक और पर्यटक यात्रा

डॉ. अरूण जैन
पंच केदार का सबसे आखिरी मंदिर है कलपेश्वर मंदिर। यही एक ऐसा पवित्र मंदिर है, जिसके पट पूरे साल खुले रहते हैं। यहां के मंदिर में मुख्य भगवान के रूप में विराजमान शिव की पूजा-अर्चना की जाती है। यहां पहुंचने के लिए घने जंगलों और मैदान से गुजरना पड़ता है। यहां बेहद ही पुराना कलपेश्वर वृक्ष है। कहा जाता है कि इस वृक्ष से जो भी मुराद मांगो वह पूरी होती है। समुद्र तल से 2,134 मीटर की ऊंचाई पर कलपेश्वर चमोली के अरगम जिले में है। हेलांग से 11 किलोमीटर दूर इस जगह पर यहां से ट्रैकिंग कर पहुंचा जा सकता है। दिल्ली से 475 किलोमीटर दूर और दो किलोमीटर की ट्रैकिंग कर यहां पहुंचा जा सकता है। पांडवों को क्षमादान दने से बचने के लिए जब भगवान शिव बैल का रूप धर भूमिगत हो गए थे तो उनके शरीर के कई अंग जमीन के ऊपर ही रह गए थे। कलपेश्वर में भी उनके एक भाग की पूजा होती है। कलपेश्वर में और भी कई जगह घूमा जा सकता है। इसके आसपास कई ऐसी जगह हैं, जो बेहतरीन पर्यटक स्थल है। रुद्रप्रयाग मंदिर- भगवान शिव का पंचकेदार में एक मंदिर यह भी है। यहां भगवान शिव को उनके मोहक चेहरे के रूप में पूजा जाता है। 2286 मीटर की ऊंचाई पर स्थित रुद्रनाथ मंदिर में सग्गार से 21 किलोमीटर की ट्रैकिंग कर यहाँ पहुंचा जा सकता है। वैसे यह गांव कलपेश्वर से बस दस किलोमीटर की दूरी पर है। जोशीमठ- यह बहुत ही छोटा तीर्थस्थल है मगर चमोली जिले का सबसे महत्वपूर्ण स्थल है। यहां पर आदि शंकराचार्य की बनाई चार मुख्य संस्थाएं हैं। साथ ही यह भगवान बद्रीनाथ की प्रतिमाएं भी देखी जा सकती हैं। ठंड के दिनों में तो ये संस्थाएं भगवान का घर बन जाती हैं। चोपता- चोपता को मिनी स्विट्जरलैंड भी कहा जाता है। कलपेश्वर से 23 किलोमीटर दूर यह जगह किसी स्वर्ग से कम नहीं। साल भर यहां पर्यटकों का तांता लगा रहता है। साहसिक खेलों के शौकीनों के लिए यह पसंदीदा जगह है। सर्दियों के दौरान यहां की प्राकृतिक सुंदरता देखने बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। नजदीकी हवाई अड्डा जॉली ग्रांट एयरपोर्ट है जो कलपेश्वर से 267 किलोमीटर की दूरी पर है जबकि नजदीकी रेलवे स्टेशन ऋषिकेश जोशीमठ से 251 किलोमीटर की दूरी पर है। यहां आने के लिए सड़क यातायात का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। कलपेश्वर पूरे साल में कभी भी जाया जा सकता है।

दिन-रात चल रहे निर्माण कार्यों से निखरेगा उज्जैन


डॉ. अरूण जैन
उज्जैन में 22 अप्रैल से 21 मई तक होने वाले सिंहस्थ की तैयारियों में और तेजी आ गयी है। शहर में इन दिनों दिन-रात निर्माण कार्य चल रहे हैं।  यह निर्माण कार्य ऐसे हैं, जो सिंहस्थ के बाद भी उज्जैन नगर में रहेंगे। निर्माण कार्यों में खान नदी डायवर्सन और दत्त अखाड़ा को सुन्दर बनाने जैसे कई कार्य ऐसे हैं, जिनका काम दिन-रात तेजी से पूरा किया जा रहा है। खान नदी डायवर्सन कार्य पूरा होने पर नये स्वच्छ शहर की शुरूआत होगी। क्षिप्रा नदी के किनारे स्थित दत्त अखाड़ा घाट पर इन दिनों लाल पत्थर लगाने का कार्य जारी है। यह कार्य उज्जैन विकास प्राधिकरण कर रहा है।        घाट सौंदर्यीकरण कार्य पर 2 करोड़ 86 लाख की राशि खर्च की जा रही है।  घाट पर सवा लाख वर्ग फीट में धौलपुरी लाल पत्थर लगाया जा रहा है। इस कार्य में सवा सौ से अधिक कारीगर दिन-रात काम कर रहे हैं। खान नदी डायवर्सन का 16.2 किलोमीटर का कार्य पूरा किया जा चुका है। सम्पूर्ण कार्य 18.7 किलोमीटर लम्बे क्षेत्र में होना है। पूरे डायवर्सन कार्य में 7,480 भूमिगत पाइप बिछाने का कार्य किया जायेगा। अब तक 6,200 भूमिगत पाइप बिछाने का कार्य कर लिया है। श्री पंचायती निरंजनी अखाड़ा उज्जैन मेला क्षेत्र में पड़ाव स्थल बडऩगर रोड पर सीमेंट-कांक्रीट सड़क और संत निवास का निर्माण पूरा कर लिया गया है। इस क्षेत्र में बिजली, पीने का पानी, शौचालय निर्माण सहित अन्य निर्माण कार्य भी सर्वोच्च प्राथमिकता से करवाये जा रहे हैं।

मध्यप्रदेश के IAS अपनी संपत्ति उजागर करने को राजी नहीं


डॉ. अरूण जैन
पांच बार प्रॉपटी का ब्यौरा देने की अंतिम तारीख बढऩे के बावजूद आईएएस अपनी संपत्ति उजागर करने को राजी नहीं हैं। जो प्रॉपटी बताते हैं वे भी आधे-अधूरे मन से, क्योंकि ये पुराने दामों पर प्रॉपटी खरीदना तो बताते हैं, पर बाजार मूल्य का कॉलम होने के बावजूद बाजार मूल्य की कीमत नहीं बताते।         अप्रैल-2016 तक की मोहलत मिली है, लेकिन अक्टूबर-2015 की बीती डेडलाइन तक महज 64 अफसरों ने ब्यौरा दिया।  दरअसल, अफसर पत्नी की प्रॉपटी नहीं बताना चाहते।न पब्लिक-डोमेन में प्रॉपटी का ब्यौरा रखने पर राजी हैं। वह भी तब, जबकि जैसा भी हो पर पांच साल से प्रॉपटी का ब्यौरा दे रहे हैं। पिछला ब्यौरा देखे तो 80 फीसदी को उनकी प्रॉपटी कितने की है पता ही नहींं। चुनिंदा आईएएस का प्रॉपटी रिकार्ड देखा, तो कुछ को बाजार कीमत नहीं मालूम। कई ने बाजार कीमत बताई, जबकि कुछ ने एक बार बताई, दूसरे साल हटा दी। इनमें से कई तो ऐसे हैं जिन्होंने 2010 के बाद नई प्रॉपटी खुद नहीं खरीदी। दस्तावेजों पर यकीन करें तो 70 फीसदी आईएएस तो पांच सालों में कोई प्रॉपटी नहीं खरीद पाएं।  पेश है एक रिपोर्ट. ...अंटोनी डिसा, मुख्य सचिव                   पांच साल में प्रॉपटी ज्यों की त्यों रही। महज 2014 में पत्नी के नाम ब्रांदा-मुंबई में फ्लैट बढ़ा।           लिखा कि पत्नी की माता ने गिफ्ट किया। 2010 में जब प्रॉपटी का ब्यौरा दिया तो खुद व परिवार के नाम करीब 81 लाख की आठ प्रॉपटी बताई। तीन भोपाल और पांच गोवा में। यह करोड़ों की होगी, लेकिन मुख्य सचिव को कीमत नहीं मालूम।               2014 के ब्यौरे में लिखा कि कीमत बाजार मूल्य के हिसाब से। 29 जनवरी 2016 को पेश 2015 का ब्यौरा ज्यों का त्यों ही है। खास यह है कि जनवरी 2014 में डिसा ने लिखकर दिया कि पणजी और गोवा में अप्रैल-2014 में संपत्ति खरीदी। एसआर मोहंती, एसीएस 2010 में छह प्रॉपटी भोपाल, इंदौर व उड़ीसा में बताई। 2012 में एक प्रॉपटी बढ़ी। पत्नी के नाम जिस प्रापॅटी का मूल्य 2010 में 40 लाख बताया था 2014 में भी उसे उतना ही बताया। ऐसे ही खुद के नाम प्रॉपटी की कीमत भी समान बताई। जनवरी-15,16 में ब्यौरा समान। बीपी सिंह, पीएस आईएएस एसोसिएशन के अध्यक्ष सिंह ने उप्र में दो प्रॉपटी बताई। कीमत न 2010 में पता थी न 2014 में। 2012 में भोपाल और इंदौर में पत्नी इंदु के नाम आवासीय प्लाट लेना बताया। 2013 व 2014 में जब ब्यौरा दिया तो पत्नी के नाम प्रॉपटी हटा दी। 2015 और 2016 का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया है। राधेश्याम जुलानिया, एसीएस 2010 में चार प्रॉपटी भोपाल और एक नोएडा में बताई। फिर 2011 में इंदौर में बच्चों के नाम प्रॉपटी खरीदी। हर साल बाजार कीमत बढऩा भी बताया। 2010 में 1.8 करोड़ की प्रॉपटी बताई। 2014 में कीमत 3.14 करोड़ बताई। जनवरी-2015 और 2016 में ब्यौरा समान है। प्रवीर कृष्ण, पीएस 2010 से 2014 तक पांच साल में संयुक्त नाम पर एक ही प्रॉपटी हरियाणा में फ्लैट बताया। इससे सालाना 4.20 लाख रुपए सालाना की कमाई भी बताई। वर्ष-2010 के ब्यौरे में बाजार मूल्य 1 करोड़ छह लाख बताया। उसके बाद के सालों में बाजार मूल्य का कॉलम खाली छोड़ दिया। कोई नई प्रॉपटी नहीं बताई। इकबाल सिंह बैस,पीएस पांच साल में बस तीन प्रॉपटी है, जो पंजाब-भोपाल में हैं। दो प्रॉपटी खुद व पत्नी के नाम बताई। 2010 में फरीदाबाद व चंडीगढ़ में 4 करोड़ 8.5 लाख की संयुक्त प्रॉपटी बताई थी।           आखिरी बार वर्ष-2011 में 50 लाख का भोपाल में मकान खरीदना बताया था। फिर नई प्रॉपटी नहीं खरीदी। 2010 में 1.80 करोड़ और 2014 में 3.64 करोड़ की प्रॉपटी बताई। 2014 और 2016 का ब्यौरा समान ही है। पंकज अग्रवाल, आयुक्त 2010 से 2016 तक केवल एक मकान भोपाल में बताया। 2010 में बाजार मूल्य 26 लाख बताया जो इस बार के ब्यौरे में बढ़कर 80 लाख हो गया। इससे सालाना 1.44 लाख रुपए की कमाई है। इसके अलावा संपत्ति की कोई डिटेल नहीं दी गई है। मनोज श्रीवास्तव, पीएस 2010 में चार प्रॉपटी भोपाल में बताई। दो की कीमत 29 लाख और बाकी दो की पता नहीं। 2014 में जब ब्यौरा दिया तो चार प्रॉपटी थी, पर किसी की कीमत पता नहीं। एक प्रॉपटी खुद, एक पत्नी और बाकी दो बच्चों के नाम। पत्नी के नाम प्रॉपटी भी माताजी की बताई। नया ब्यौरा अभी सार्वजनिक नहीं किया। मोहम्मद सुलेमान, पीएस  किसी प्रॉपटी की कीमत नहीं पता। 2010 में उप्र, हरियाणा व भोपाल में प्रॉपर्टी बताई। उप्र-भोपाल की प्रॉपर्टी पत्नी के साथ संयुक्त बताई। भोपाल में 13 लाख का प्लाट बताया। 2012 में खुद के नाम की गोरेगांव-हरियाणा की प्रॉपटी ब्यौरे से हटी। फिर 2014 में नोएडा में एक प्रॉपटी बताई। जनवरी-15 और जनवरी-16 में ब्यौरा समान है। अशोक वर्णवाल,पीएस 2010 में केवल झारखंड में एक मकान बताया था। फिर 2011 में भोपाल में एक और 2014 में एक और प्रापर्टी भोपाल में बताई। कुल तीन प्रापर्टी 2014 में बताई। जो इस बार भी ज्यों की त्यों है। अरुणा शर्मा, एसीएस अरुणा की प्रापर्टी पांच साल में उल्टे कम हो गई है। 2010 में करीब एक करोड़ 22 लाख रुपए की छह प्रॉपटी भोपाल, इंदौर, हरियाणा, नोएडा में बताई। 2011 में पति-बच्चे के नाम 1.90 करोड़ की नई प्रॉपटी बताई। 2012 में दो और 2013 में एक प्रॉपटी को ब्यौरे से हटाया। नया ब्यौरा अभी दिया नहीं। राजेश राजौरा,पीएस  2010 से 2014 तक ज्यों की त्यों प्रॉपटी रही। 2010 के भोपाल में एक प्रॉपटी 22.40 लाख में 2006 में खरीदना बताई थी। बाजार कीमत न तो 2010 में पता थी और न 2014 में पता रही। नया ब्यौरा अभी तक सार्वजनिक नहीं।

एक हिल स्टेशन है मोरी कभी गए हैं आप ? 


डॉ. अरूण जैन
दिल्ली से 410 किलोमीटर की दूरी पर भीड़भाड़ से दूर हिल स्टेशन है- मोरी। उत्तर-पश्चिम गढ़वाल क्षेत्र स्थित मोरी उत्तरकाशी जिले के बेहतरीन हिल स्टेशनों में से एक है। मोरी हिल अपने आप में खूबूसरती के लिए मशहूर है। यहां की सुंदरता और मनोहारी दृश्य इस हिल स्टेशन का बढ़ा देते हैं। यहां का शांत वातावरण, स्वच्छ हवा और मौसम इसे बेहतरीन हिल स्टेशनों में से एक बनाते हैं। पेड़ों से लदे पहाड़। हरे-भरे धान के खेत, कल-कल बहती टान्स नदी, बेहतरीन वॉटरफॉल, झीलें और देवदार के पेड़ मोरी को और भी मनोहारी बनाते हैं। एशिया का सबसे लंबा देवदार का जंगल मोरी में ही है। मोरी न सिर्फ प्राकृतिक संपदा का धन है बल्कि प्राचीन मंदिरों और बेहतरीन वास्तुशिल्प से भी समृद्ध है। समुद्रतल से 1150 मीटर ऊपर टॉन्स नदी के किनारे है मोरी। यहां बहने वाली टॉन्स यमुना की सहायक नदियों में से एक है। टॉन्स घाटी के लोग यह दावा करते हैं कि वे पांडवों और कौरवों के पूर्वज थे। वे आज भी उन दिनों की संस्कृति, बहु विवाह को मानते हैं। यहां के टॉन्स नदी में रिवर राफ्टिंग का आनंद लिया जा सकता है। यहां पर कैम्पिंग भी की जा सकती है। इसके लिए यहां सारा सामान उपलब्ध कराया जाता है। इसके अलावा हाइकिंग, ट्रेकिंग, नेचर वॉक का आनंद किया जा सकता है। चिडिय़ों की चहचहाहट, वनस्पति और जीव-जंतु पर्यटकों को चौका देते हैं। रॉक क्लांइबिंग भी मोरी के मशहूर खेलों में शामिल है। मोरी में देखने लायक बहुत कुछ है जैसे- इच्छारी बांध- यह बांध मोरी के मुख्य आकर्षण में से एक है। यह बांध टॉन्स नदी पर बना है। किवदंती के अनुसार ऐसा माना जाता है कि यह नदी राक्षसी सूर्पनखा के आंसुओं से उत्पन्न हुई थी। दुर्योधन मंदिर- यह मंदिर पांडवों का बनाया है। लकडिय़ों से बना मंदिर बेहतरीन कलाकृति का उदाहरण है। यह मंदिर कौरवों के सबसे बड़े भाई दुर्योधन को समर्पित है। लुनागढ़ क्रीक- यह एक खूबसूरत पैलेस में से एक है। मोरी से 30 मिनट पैदल का रास्ता तय कर इस पैलेस तक पहुंचा जा सकता है। इसमें छोटा सा तालाब और वाटरफॉल भी देखा जा सकता है। यह एशिया के सबसे बड़े देवदार के जंगलों से घिरा है। इसमें बच्चों और बड़ों दोनों के लिए प्रकृति से जुड़े विभिन्न एडवेंचर हैं। नेटवार- मोरी से ग्यारह किलोमीटर दूर आयाताकार लकड़ी का बना एक मंदिर दुर्योधन के मित्र कर्ण को समर्पित है। जैखोल- मोरी से 20 किलोमीटर की दूरी पर टॉन्स घाटी के ऊपर है जैखोल गांव। यह छोटा सा गांव देवदार जंगलों के बीच है। मोरी जाने के लिए मसूरी से बस या टैक्सी ली जा सकती है। मसूरी से मोरी सिर्फ 139 किलोमीटर है। नजदीकी हवाई अड्डा जॉली ग्रांट देहरादून है, जो 170 किलोमीटर दूर है। नजदीकी रेलवे स्टेशन देहरादून है जो 178 किलोमीटर की दूरी पर है। यहां जाने का सबसे अच्छा समय अप्रैल से जून तक है। ठंड में यहां का तापमान दो डिग्री तक हो जाता है।

अब लाड़लियों को लक्ष्मी के बजाय प्रमाण-पत्र


डॉ. अरूण जैन
प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी के मुखिया के शासन की सबसे बड़ी उपलब्धि राज्य सरकार द्वारा लाड़ली लक्ष्मी योजना के अन्तर्गत पोस्ट आफिस की एनएससी दी जाती थी अब उसकी जगह केवल एक प्रमाण पत्र दिया जाएगा, यही नहीं अभी तक जिन लाड़लियों को यह एनएससी प्रदान की गई है वह वापस मंगाई जा रही है और उसकी वजह एनससी जारी की जा रही है कुल मिलाकर राज्य सरकार ने जो लाड़ली लक्ष्मी के नाम पर अपने हितैषी होने का ढिंढोरा पीट रखा था अब वह राज्य के खजाने की कंगाली के हालत को देखते हुए अब उसमें बदलाव कर दिया गया। इससे प्रदेश की लाड़लियों को भविष्य में यह गारंटी नहीं है कि अब उनको 18 वर्ष की उम्र पूरी करने पर इस योजना के अन्तर्गत मिलने वाला एक लाख 38 हजार के लगभग मिलने वाली राशि मिल ही जाएगी, क्योंकि भविष्य किसी को देखकर नहीं आता यदि यह सरकार भविष्य में रही या नहीं इसके लोकतंत्र में कोई गारंटी नहीं है, भगवान न करे कि लोकतंत्र का एक दिन का राजा इस सरकार को पलट दे और प्रदेश में कोई दूसरी सरकार आ जाए और वह इस योजना को एक झटके में बंद करने की सोच ले तो अभी तक मिली लाड़ली लक्ष्मी योजना के अंतर्गत प्रदेश की उन लाड़लियों को एक नया पैसा भी नहीं मिलने की संभावनाएं भी प्रबल हैं, क्योंकि आज राज्य की जो आर्थिक स्थिति है हो सकता है कि वह कल भी नहीं सुधरे और राज्य कंगाली के दौर में हो तो फिर यह राशि जिन लाड़लियों को यह सरकार एनससी की बजाय खाली प्रमाण पत्र दे रही है, उसकी राशि मिलेगी कि नहीं इसकी कोई गारंटी नहीं है, अभी तक राज्य सरकार द्वारा लाड़ली लक्ष्मी योजना के तहत हुए नये बदलाव में अब विभाग लाड़लियों को प्रमाण पत्र जारी करेगा सारी जानकारी आनलाइन दर्ज की जाएगी प्रमाण पत्र जारी होने के बाद छठवीं कक्षा से लाड़लियों को राशि मिलनी शुरू हो जाएगी छठवीं में प्रवेश लेने के साथ ही लाड़ली के खाते में दो हजार रुपये जमा कर दिये जायेंगे इसी तरह नौवीं कक्षा में पहुंचने के बाद चार हजार रुपये जमा कर दिये जायेंगे 11वीं और 12वीं में छ:-छ: हजार रुपये दिये जायेंगे इसके बाद 18 साल की उम्र पूरी करने के बाद यदि उसका विवाह 21 साल तक नहीं होता तो उसे शासन की तरफ से एक लाख 18 हजार रुपये मिलेंगे। इसके साथ ही यह शर्त भी है कि लड़की की उम्र 21 साल होनी चाहिए और वह कम से कम हाईस्कूल की परीक्षा में उत्तीर्ण होना चाहिए, मध्यप्रदेश की वर्तमान कानून व्यवस्था को देखते हुए जिसके चलते राज्य में प्रतिदिन नाबालिगों के साथ बलात्कार की घटनाएं घट रही हैं उनसे चिंतित हर लाड़ली का परिजन रहता है और वह ऐसे माहौल में अपनी बच्ची को कम से कम ग्रामीण क्षेत्रों में तो 21 साल तक शादी न करने के पक्ष में नहीं रहता है जैसा कि वर्तमान में प्रदेश का माहौल है हर लाड़ली का पालक अपनी बच्ची के हाथ जल्दी से जल्दी पीले करने के पक्ष में रहता है। इस भय के वातावरण के चलते बच्चियों की शादी 21 साल से पहले ही कर दी जाती है। तो वहीं मध्यप्रदेश सरकार की जिस तरह से संविधान में प्रदत्त मूल अधिकारों की कटौती का माहौल बन रहा है जिसके चलते स्वास्थ्य, शिक्षा और पानी की व्यवस्था कराने में यह सरकार पूरी तरह से नाकामयाब साबित हो रही है और यह सब व्यवस्थायें निजी हाथों में सौंपे जाने की तैयारी कर रही है तो वहीं शिक्षा के मामले में भी सरकारी सूत्रों से जो खबरे पिछले दिनों समाचार पत्रों की सुर्खियां रही जिसके अंतर्गत 90 प्रतिशत सरकारी शिक्षण संस्थाएं सरकार बंद करने की ओर कदम बड़ा रही है, यदि यही स्थिति रही तो ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक शाला की तो बात छोडि़ए हाई स्कूल और हायर सेकेण्डरी स्कूल तक सरकारी खुले नजर नहीं आएंगे और इनका स्थान ले लेंगी निजी शिक्षण संस्थाएं। जैसी की सरकार की योजना है कि यदि यह योजना कार्य रूप में परिणित हो गई तो प्रदेश के लाखों लड़लियां शिक्षा से वंचित हो जाएंगी और प्रदेश में जिस तरह का भय का वातावरण नजर आ रहा है उसके चलते कोई भी पालक अपनी बच्ची को कम से कम ग्रामीण क्षेत्रों में लम्बी दूरी तय करके पढ़ाने के पक्ष में नहीं रहेगा। इस स्कीम के लागू होते ही अब लाड़लियां भी पढ़ाई से वंचित हो जाएंगी तो ऐसे में सरकार की इस योजना के अन्तर्गत जो नियम निर्धारित किये गये उसके अनुसार वह 9वीं और 11वीं तक अध्ययन जारी रख  पाएगी या नहीं यह भी संभावनाएं नजर आ रही हैं, कुल मिलाकर सरकार की इस योजना के चलते प्रदेश की लाड़लियों को अब सरकार द्वारा दी जानेवाली लक्ष्मी मिलने पर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं। वैसे इस योजना से यह साफ जाहिर होता है कि सरकार की लाड़ली लक्ष्मी योजना खटाई में जाती नजर आ रही है। पता नहीं इसके बाद और कितनी योजनाओं पर सरकार परिवर्तन करके उन्हें धीरे-धीरे बंद करने की तैयारी करेगी जिसको लेकर आज वह वाहवाही लूटने में लगे हैं।  

अब पत्रकारों का दमन नही कर पायेगी पुलिस

डॉ. अरूण जैन
पत्रकारों के साथ बढ़ती ज्यादती और पुलिस के अनुचित व्यवहार के चलते कई बार पत्रकार आजादी के साथ अपना काम नही कर पाते है... उसी को ध्यान में रखते हुए भारतीय प्रेस काउंसिल के अध्यक्ष ने राज्य सरकारों को चेतावनी देते हुए निर्देश भी दिया है कि पुलिस आदि पत्रकारों के साथ बदसलूकी ना करे...। पत्रकार भीड़ का हिस्सा नही है...। किसी स्थान पर हिंसा या बवाल होने की स्थिति में पत्रकारों को उनके काम करने में पुलिस व्यवधान नही पहुँचा सकती। पुलिस जैसे भीड़ को हटाती है वैसा व्यवहार पत्रकारों के साथ नही कर सकती। ऐसा होने की स्थिति में बदसलूकी करने वाले पुलिसवालों या अधिकारियों के विरुद्ध आपराधिक मामला दर्ज किया जायेगा...। कहाँ कि जिस तरह कोर्ट में एक अधिवक्ता अपने मुवक्किल का हत्या का केस लड़ता है पर वह हत्यारा नही हो जाता है। उसी प्रकार किसी सावर्जनिक स्थान पर पत्रकार अपना काम करते है पर वे भीड़ का हिस्सा नही होते। इस लिए पत्रकारों को उनके काम से रोकना मिडिया की स्वतंत्रता का हनन करना है...सभी राज्यों को दिए निर्देश. प्रेस काउन्सिल ने देश के केबिनेट सचिव, गृह सचिव, सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, मुख्य सचिवों व गृह सचिवों को इस सम्बन्ध में निर्देश भेजा है... और उसमे स्पष्ट कहा है कि पत्रकारों के साथ पुलिस या अर्द्ध सैनिक बलों की हिंसा बर्दाश्त नही की जायेगी...। सरकारे ये सुनिश्चित करे की पत्रकारों के साथ ऐसी कोई कार्यवाही कही न हो। पुलिस की पत्रकारों के साथ की गयी हिंसा मिडिया की स्वतन्त्रता के अधिकार का हनन माना जायेगा जो उसे संविधान की धारा 19 एक ए में दी गयी है। और इस संविधान की धारा के तहत बदसलूकी करने वाले पुलिसकर्मी या अधिकारी पर आपराधिक मामला दर्ज होगा।

Wednesday, 13 April 2016

आनन्दी बेन के बहाने मोदी का कईयों पर निशाना


डाॅ. अरूण जैन
पिछले दिनों गुजरात की मुख्यमंत्री आनन्दी बेन पटेल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिलीं, इसी दौरान नरेन्द्र मोदी ने अनन्दी बेन से भेंट के दौरान कहा कि शिकायतें मिली हैं कि सरकार के कामकाज में आपके दोनों भाई-बहन जबरदस्ती  दखल करते हैं और खूब पैसा बना रहे हैं, मोदी के द्वारा अनन्दी बेन से की गई इस तरह की चर्चा के बाद राजनीतिक क्षेत्र में कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं इस संबंध में राजनीतिक पण्डितों का मानना है कि कहीं मोदी ने अपने प्रदेश गुजरात की मुख्यमंत्री अनन्दी बेन के बहाने पार्टी के अन्य मुख्यमंत्री और मंत्रियों पर तो निशाना नहीं साधा है? यह उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश के संगठन के मुखिया नन्दकुमार सिंह चौहान के द्वारा मोदी की प्रदेश में आने की तैयारी के दौरान यह कहना कि हमारे कामकाज का आंकलन दिल्ली भी करती है, श्री चौहान के इस तरह के संकेत से यह झलकता है कि कहीं मोदी ने अनन्दी बेन के बहाने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री  और मंत्रियों को तो चेतावनी देने का काम तो नहीं किया है, यह सर्वविदित है कि जिस तरह की शिकायतें अनन्दी बेन के मामले में उनके परिजनों का राजनीति में दखलंदाजी करने और पैसा कमाने जैसी बात नरेन्द्र मोदी द्वारा की गई। ठीक उसी तरह का माहौल मध्यप्रदेश में वर्षों से स्थित है और प्रदेश की प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस के नेताओं द्वारा सदन से लेकर सड़कों तक मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के परिजनों से लेकर उनके मंत्रीमण्डल के सदस्यों पर कई गंभीर आरोप लगाए हालांकि यह आरोप सत्ता बल के दम पर दबा दिए गए तो वहीं कई मामलों को लेकर न्यायालय तक विपक्षी दलों के नेताओं को घसीटा गया। शायद इसी वजह से वह दबते रहे मगर भाजपा के संगठन के मुखिया नन्दकुमार सिंह चौहान के हाल ही में इस तरह के दिये गये बयान से अब यह स्पष्ट हो गया है कि प्रदेश के सत्ताधीशों के परिजनों द्वारा राज्य में चल रही चर्चाओं के अनुसार प्रदेश में भी सत्ता पर काबिज सत्ताधारियों के परिजनों के द्वारा ठीक गुजरात की मुख्यमंत्री अनंदी बेन के परिजनों की तरह लगातार गतिविधियां चल रही हैं, शायद इसका भान प्रधानमंत्री को है, हालांकि लोगों का यह भी मानना है कि प्रधानमंत्री के राज्य के सत्ता से जुड़े हर व्यक्ति की पल-पल की खबरें ले रहे हैं, इसके पीछे प्रधानमंत्री की क्या मंशा है, यह तो वही जाने लेकिन उनका यह नारा कि ना खायेंगे और ना खाने देंगे के विपरीत इस प्रदेश में खाओ और खाने दो की नीति का अनुसरण किया जा रहा है और इसी के चलते राज्य में मंत्रियों अधिकारियों, सत्ता के दलालों और ठेकेदारों का एक रैकेट सक्रिय है जो तमाम सरकारी योजनाओं में हेराफेरी करके जहां सरकारी खजाने को चूना लगाने का काम कर रहा है इसके प्रमाण पिछले दिनों मुख्यमंत्री द्वारा अपने अधिकारियों के  सूखा पर्यटन के अंतर्गत राज्यभर में भेजने और जमीनी हकीकत का पता लगाने के बाद जो रिपोर्ट इस सूखा पर्यटन के बाद अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को सौंपी है उसमें इस बात का उल्लेख है कि राज्य में सरकारी योजनाओं में भयंकर धांधली चल रही है और बिना पैसे लिये लोगों का कोई काम नहीं हो रहा है तो वहीं सरकारी योजनाओं की जानकारी आमजन तक नहीं है, इससे यह साफ जाहिर हो जाता है कि सरकारी योजनाओं की जानकारी देने काम जहां सरकारी अधिकारियों का है तो वहीं संगठन से जुड़े लोगों का भी यह दायित्व बनता है कि वह लोगों की समस्याओं से रूबरू हों और उनकी पार्टी की सरकार द्वारा चलाई जा रही लोककल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्रदेश के जन-जन तक पहुंचायें लेकिन ऐसा कुछ नजर नहीं आ रहा है कि पार्टी से संगठन से जुड़े लोगों की रुचि इस ओर हो, ऐसे कई अवसर भी आए जब प्रदेश के सत्ता और संगठन से जुड़े मुखियाओं द्वारा अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं से यह कहा गया कि वह राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही जनहितैषी योजनाओं की जानकारी जन-जन तक पहुंचाएं लेकिन आज तक ऐसा कहीं नजर नहीं आया कि संगठन से जुड़े लोगों द्वारा इस तरह का कोई कदम उठाया हो, हाँ यह जरूर देखा गया कि जो सरकार द्वारा जनकल्याणकारी येाजनायें आम जनता के लिये चलाई जा रही हैं उन योजनाओं का लाभ उठाने में संगठन के लोग सक्रिय दिखाई देते हैं, शायद यही वजह है कि प्रदेश भर में संगठन से जुड़े अधिकांश लोगों का जीवन स्तर इस सरकार के चलते ही सुधरा है यह उनके आसपास के रहनेवाले लोग भी जान रहे हैं तो वहीं शिवराज सिंह चौहान ने शायद यही वजह है कि नरेन्द्र मोदी के मध्यप्रदेश प्रवास के दौरान सीहोर जिले के शेरपुरा में आने का जब न्यौता पूरे प्रदेश के किसानों को किसान कुंभ के लिये देते वक्त यह भी कहा कि कार्यकर्ता अपने वाहनों से आयें मुख्यमंत्री के इस संदेश से यह साफ जाहिर होता है कि प्रदेश में उनके कार्याकाल के दौरान उन भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं की स्थिति में सुधार हुआ है जिनके पास कल तक टूटी साइकिल खरीदने तक के पैसे नहीं रहते थे आज वह आलीशान भवनों और लग्जरी वाहनों में फर्राटे लेते नजर आ रहे हैं। इस सब स्थिति को देखते हुए राष्ट्रीय जनशक्ति पार्टी की तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष सुश्री उमा भारती के 2009 तक लगाए गए इस तरह के आरोपों की याद आ जाती है और यह साफ हो जाता है कि उन्होंने उस समय जो कहा वह अब हकीकत प्रदेश में भाजपाई कार्यकर्ताओं और नेताओं के विकास को देखकर नजर आने लगा है, मामला जो भी हो लेकिन हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा उनके गृह जिले गुजरात की मुख्यमंत्री अनन्दी बेन के परिजनों के सरकारी कामकाज में दखलंदाजी और पैसा कमाने की जो बात कही है, देखना अब यह है कि मध्यप्रदेश में चल रहे इस तरह के वातावरण को लेकर प्रधानमंत्री इस प्रदेश पर कब निगाहे करम करेंगे जब ऐसा होगा तो उनका यह नारा न खाएंगे न खाने देंगे के प्रति प्रदेश के साढ़े सात करोड़ नागरिकों में भी यह विश्वास जागृत होगा कि वह जो कहते हैं वह करते हैं, देखना अब यह है कि वह क्षण कब आएगा जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस तरह का संदेश प्रदेश के अपने नेताओं को देंगे।