Monday, 2 January 2017

मोदी अब आंदोलन बन चुके हैं, जनता उनके साथ है

डॉ. अरूण जैन
सडक़ से संसद तक ये कौन लोग हैं जो नोटबंदी के विरोध में लामबंद हो रहे हैं ? ये कौन लोग हैं जिनको काले धन की जमाखोरी बहुत पसंद है ? ये कौन लोग हैं जिनको देश की सफाई ठीक नहीं लग रही ? ये कौन लोग हैं जो कोयला घोटाले से लेकर 2जी तक की करोड़ों की लूट के आरोप के चलते सत्ता से बाहर हुई कांग्रेस के साथ खड़े हो गए हैं ? ये कौन हैं जिन्हें लोकसभा और विधानसभा के चुनाव में टिकट की नीलामी नजऱ नहीं आती ? ये किसका विरोध कर रहे हैं और क्यों कर रहे हैं ? केवल कानाफूसी में करोड़ों करोड़ों की दलाली और जमाखोरी की चुगली करने वाले ये सभी लोग किसके खिलाफ लामबंद हुए हैं ? ममता बनर्जी तो गरीबों की मसीहा कही जाती रही हैं। वह सबसे पहले आवाज़ मुखर कराती हैं तो ताज्जुब होता है कि किस तरह वेश बना कर ये लोग सत्ता शीर्ष तक पहुंचते हैं। मायावती जी के बारे में लिखना जरूरी नहीं लगता क्योंकि उत्तर प्रदेश के हर आदमी की जबान पर इनके धन की चर्चा सामान्य तौर पर होती रहती है। इनके दल के टिकेट कैसे मिलते हैं और कितने में मिलते हैं इस बारे में इन्हीं के लोग सब कुछ मीडिया के सामने कई बार कह चुके हैं। मुलायम सिंह जी की पार्टी के बारे में भी कुछ छिपा नहीं है। कांग्रेस का तो बंटाधार ही भ्रष्टाचार के कारण हुआ है। जाहिर है इनकी इस बार की यह एकता बहुत कुछ उगल देगी, इसको ये अभी समझ नहीं रहे हैं। दरअसल इन्हें अभी भी आभास नहीं है कि नरेंद्र मोदी केवल भारत के प्रधानमन्त्री ही नहीं हैं बल्कि वह अब सचमुच एक आंदोलन बन चुके हैं। इस आंदोलन में देश उनके साथ है। नौजवान उनके साथ है। व्यवसायी उनके साथ है। गरीब उनके साथ है। जो लोग संसद से अब सडक़ पर आकर नोटबंदी के विरोध की जुगत में लगे हैं वे वास्तव में क्या करना चाह रहे हैं, यह बात देश भली प्रकार से समझ रहा है। देश को मालूम हो चुका है की प्रधानमन्त्री के इस फैसले ने उन लोगों की कमर तोड़ दी है जो रातोंरात करोड़पति बन जाते थे। देश को मालूम है की इस कदम ने आतंकवाद और अलगाववाद की सियासत करने वालो के सारे रास्ते बंद कर दिए हैं। ये वही लोग हैं जो इस मुद्दे पर जनता को बरगला कर, उकसा कर देश का माहौल अस्थिर करना चाहते हैं। इनमें कई ऐसी शक्तियां हैं जो इनको मोटी फंडिंग करने को तैयार हैं ताकि उनकी लूट खसोट और आपराधिक गतिनविधियों को रोक न लगने पाए।  सच तो यह है की यह पूरी सियासत एक ख़ास किस्म के तुष्टिकरण के लिए रची जा रही साजि़श है जो देश को झुलसा कर छोड़ेगी। अभी तक भ्रष्टाचार और काले धन पर सरकार को बार बार घेरने और विफल रहने की दलीलें देकर विरोध करने वाले सभी आज यदि एक साथ खड़े होकर काले धन पर रोक का विरोध कर रहे हैं तो जाहिर है इसके पीछे भी बड़ी शक्तियां काम कर रही होंगी। मायावती, ममता बनर्जी, मुलायम सिंह, राहुल गांधी और अरविन्द केजरीवाल सरीखे लोगों को जनता ठीक से समझती है। पश्चिम बंगाल का शारदा घोटाला अभी भी सभी को याद है। उत्तर प्रदेश में मायावती जी और मुलायम सिंह जी के बारे में भी जनता कुछ भूल नहीं पायी है। इस समय भी उत्तर प्रदेश में जो हालात हैं वह सभी के सामने हैं। नियुक्तियों से लेकर निर्माण कार्यों तक में रिश्वतखोरी और गड़बडिय़ों की भरमार है। उत्तर प्रदेश के हालात इन लोगों के कारण ही बदतर हो चुके हैं। आर्थिक कदाचार और जातिवाद से इतने बड़े प्रदेश को इन दोनों पार्टियों ने बर्बाद कर रखा है। यहाँ एक बड़ी मज़ेदार बात देखने को मिल रही है कि जिस जनता दल यू के नेता नीतीश कुमार ने मोदी के इस कदम का समर्थन किया है उसी के बाकी लोग भी इन तेरह पार्टियों में शामिल हैं जो नोटबंदी का विरोध कर रही हैं। इन लोगों को अभी भी समझ में यह बात क्यों नहीं आ रही कि इस नोटबंदी के बाद हुए उपचुनाव में जनता ने बीजेपी को ही बहुमत दिया है। फिर भी ममता बनर्जी का यह कहना कि देखें मोदी को कौन वोट देता है, समझ से पर है। इस पूरे विरोध के पीछे कोई न कोई ताकत तो जरूर है।

No comments:

Post a comment