Tuesday, 28 June 2016

उज्जैन के कुंभ और महाकाल भस्मार्ती के लिए थाईलेंड के भारतवासियों में विशेष आकर्षण


(बैंकाक से डॉ. अरूण जैन)
पूर्वी एशियाई देशों में थाईलेंड का अपना एक आकर्षण है। न केवल भारतीय बल्कि विश्व के अन्य देशों से भी पर्यटक बड़ी संख्या में यहां आते हैं। इसमें कोई दो राय नही कि ‘‘सेक्स वर्कर’’ को उद्योग का दर्जा देकर इस देश ने पूरे विश्व में अपनी अलग पहचान कायम कर ली है और शायद इसी का प्रभाव है कि यहां संबद्ध उद्योग-धंधे बहुत बड़ी संख्या में विकसित हो गए हैं। संभवतः इसी आकर्षण से पर्यटकों की संख्या भी यहां पर अन्य देशों से अधिक है। 
थाईलेंड की कुल जनसंख्या का एक तिहाई हिस्सा भारतीयों का है जो या तो होटल और रेस्टोरेंट व्यवसाय स्थापित कर यहां बस गए हैं अथवा वे यहां पर्यटन और होटल व्यवसाय में कार्य कर रहे हैं। होटल और रेस्टोरेंट व्यवसाय तो यहां अत्याधिक फला-फूला है। मध्यप्रदेश से गए पत्रकारों के एक दल, जिसमें मैं भी शामिल था, ने बैंकाक, पर्यटक एवं मनोरंजन स्थल पटाया और अन्य शहरों में पाया कि यहां रहने वाले भारतीय उज्जैन के सिंहस्थ को कुंभ के नाम से जानते हैं। उनकी शिप्रा नदी स्नान के प्रति भी अगाध श्रद्धा है। पत्रकारों के दल ने पृथक-पृथक समूह चर्चाओं में इन भारतीयों को सिंहस्थ में अगले माह उज्जैन आने का निमंत्रण देते हुए बताया कि इस बार 22 अप्रैल से 21 मई तक उज्जैन में सिंहस्थ महापर्व है। पहली बार मध्यप्रदेश सरकार ने उज्जैन में इस महाआयोजन की तैयारी पर पांच हजार करोड़ रूपए खर्च किए हैं। यह राशि अब तक हुई महापर्वों की तुलना में 20 गुना अधिक है। इस राशि से मुख्य रूप से 14 नए ओवर ब्रिज, फोरलेन सड़कें, रिंग रोड, आठ किलोमीटर लंबाई के नदी घाट बनाए गए हैं। इसके अलावा पहली बार ही पूरे महापर्व को हाईटेक व्यवस्थाओं से सुसज्जित किया गया है। बाहर से आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को पार्किंग स्थल, मेला क्षेत्र, साधुओं के साधना स्थल, घाटों पर जाने वाले मार्ग, आदि की जानकारी एक ही मोबाइल एप पर उपलब्ध हो जाएगी। भीड़ नियंत्रण की सर्वाधिक बेहतर व्यवस्थाएं की गई हैं, जिसमें न भटकने का खतरा है, न बच्चों को गुम होने का। थाईलेंड के कई भारतीयों ने अगले माह कुंभ में उज्जैन आने की इच्छा व्यक्त की। मैने उन्हे बताया कि दिल्ली से इन्दौर की सीधी वायु सेवा उपलब्ध है। रेल मार्ग पर भी उज्जैन, दिल्ली से सीधा जुड़ा हुवा है। वायु सेवा से इन्दौर पहुंचने पर वहां से अच्छी पब्लिक ट्रांसपोर्ट उपलब्ध होगी, जो मात्र 40-45 मिनिट में उज्जैन पहुंचा देगी। सरकार और समाजसेवी संगठनों ने भी सिंहस्थ (कुंभ) में आने वालों की हर मदद के साधन जुटाएं हैं। होटल व्यवसाय में लगे पंजाबी, पर्यटन-रेस्टोरेंट व्यवसाय में कार्यरत बिहार, उत्तरप्रदेश के रहवासियों ने पत्रकारों के दल को आश्वस्त किया कि वे अवश्य आएंगे।
महाकाल मंदिर और उसमें होने वाली भस्मार्ती को लेकर भी थाईलेंड भारतीय बहुत उत्सुक हैं। सभी का कहना है कि महाकाल को प्रतिदिन ताजा चिता की भस्म से लेप किया जाता है। वे उसे प्रत्यक्ष देखना चाहते हैं। केवल चर्चा से ही वे रोमांचित हो जाते हैं। मैने उन्हें कहा कि वे आसानी से भस्मार्ती दर्शन कर सकेंगे।

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