Tuesday, 10 July 2018

मोदी-शाह की मजबूरी बने शिवराज

डाॅ. अरूण जैन
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदर दास मोदी और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की मजबूरी बन गए हैं। दिल्ली भेजी गई एक खुफिया रिपोर्ट में जहां मध्यप्रदेश सरकार और संगठन के चाल-चरित्र-चेहरे को बदलने की आवश्यकता जतलाई गई हैं, वही रिपोर्ट में चेतावनी भी दी गई हैं कि शिवराज के बिना नैय्या पार भी नहीं हो पाएगी। आज के हालात में आगामी विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के 70 सीटों पर ही सिमटने की आशंका जतलाई गई हैं। सूत्रों के अनुसार सरकार के चाल-चरित्र-चेहरे को लेकर काफी तीखी टिप्पणी की गई हैं। सरकार के भ्रष्ट कारनामों के साथ साथ जनप्रतिनिधियो के भ्रष्टाचार, जनता के साथ संवादहीनता, शासकीय योजनाओं का लाभ न दिला पाना, झूठी वाहवाही बटोरने जैसी टिप्पणी की गई हैं। जो सरकार के चरित्र को दर्शा रहा हैं। सरकार की चाल को लेकर अधिकारियों और कर्मचारियों से मनमानी पूर्ण रवैय्या, लालफीताशाही, समयबद्ध कार्य न होना, सरकारी योजनाओं में भी गड़बड़ी को लेकर टिप्पणी की गई हैं। उपरी स्तर पर सरकार का चेहरा बदलने की आवश्यकता बताई हैं। जिसमें प्रमुख पदों पर बैठे अधिकारियों के साथ-साथ कई मंत्रियों सहित मुख्यमंत्री भी शामिल हैं। हालांकि लोकप्रियता के लिहाज से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खासकर मध्यप्रदेश में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मुकाबले ज्यादा लोकप्रिय माने गए हैं। पर पूर्व के मुकाबले उनकी लोकप्रियता में गिरावट दर्ज की गई हैं। इस रिपोर्ट में लगभग ऐसे दस प्रमुख अधिकारियों को बदलने की आवश्यकता जताई गई हैं। जिन पर शिवराज सिंह चौहान अत्यंत भरोसा करते हैं। दिल्ली नेतृत्व को भेजी गई रिपोर्ट में आगामी विधानसभा चुनाव में सरकार बनाने लायक फार्मुले तक पहुंचने के लिए भाजपा प्रदेश संगठन का भी चाल चरित्र चेहरे को लेकर प्रतिकुल टिप्पणी की गई हैं। कार्यकर्ता असंतुष्ट ही नहीं सरकार और संगठन से नाराज हैं। जिसके चलते सरकारी और संगठन के कार्यक्रम से कार्यकर्ता दूरी बना रहा हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी आपसी लड़ाई में उलझे हुए हैं। चुनिन्दा नेता और पदाधिकारी सरकार की मलाई जमकर खा रहे हैं। जिसके चलते आमजन के बीच पार्टी का पक्ष नहीं रखा जा रहा हैं। रिपोर्ट में कार्यकर्ताओं में उत्साह, संगठन के प्रति दायित्व का भाव जगाने की आवश्यकता जतलाई गई हैं। मध्यप्रदेश भाजपा के कार्यकर्ताओं के मूल चरित्र को वापस लाने की आवश्यकता जतलाई गई हैं जिससे भाजपा की चाल भी बदलेगी। संगठन का भी चेहरा बदले बिना कार्यकर्ता के चाल और चरित्र को नहीं बदला जा सकता इसलिए प्रदेशाध्यक्ष सहित पॉच पदाधिकारियों के ऐसे नाम भेजे गए हैं। जो विभिन्न स्तरों पर सरकार का जमकर दोहन कर रहे हैं। दो दिन पूर्व दिल्ली में प्रदेश के दो आला नेताओं को अमित शाह ने तलब किया था और उनसे ताजा हालात पर चर्चा भी की थी। हालियां भेजी गई रिपोर्ट इसी माह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के प्रदेश दौरे के बाद एकत्रित की गई हैं। जिसको लेकर अमित शाह ने अपनी रणनीति को अंतिम रूप देना भी शुरू कर दिया हैं। कुछ ही दिनों में इसके परिणाम दिखना शुरू भी हो जाएंगे। हालांकि यह बात काफी लंबे समय से संगठन के आला स्तर पर चर्चा में थी। पर बात शिवरा के विकल्प पर आकर अटक रही हैं। चुनावी वर्ष में शिवराज को हटाना आला नेतृत्व रिस्क बतौर मान रहा हैं। क्योंकि मोदी और शाह की चिंता अक्टूबर-नवंबर 2018 के चुनाव के साथ साथ 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव भी हैं और मध्यप्रदेश में सीटों का गणित गड़बड़ाना काफी नुकसान भरा हो सकता हैं।

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